Thursday, 9 February 2012

rashtriy chintan

देश किधर जा रहा है, इससे किसी को कोई सरोकार नहीं है,राजनीति की स्थिति बहुत गंभीर हो गई है ,
सत्ता के लिए राजनेता किसी भी हद तक गुज़र सकते हैं,कोई भी नीचता का कार्य कर सकते है, देश में 
यदि कही अलगाव है,तो उसके सबसे बड़े दोषी राजनेता ही हैं,जो अपने स्वार्थ के लिए जनमानस को 
लड़ाने में पीछे नहीं हैं, राजनीति को व्यापार बना दिया गया है, समझ नहीं आता कि भरे पेट नेता अपनी 
भूख शांत करते हैं या गरीबों की ? दिखावा हर पेट को रोटी हर हाथ को रोजगार का करते हैं,किन्तु ये 
कितने सही हैं तथा गरीबों के कितने हमदर्द हैं,यह इनके आचरण से पता चलता है, जब ये अपने अनपढ़
और योग्य रिश्तेदारों के नाम से कम्पनियां बनाकर करोड़ों अरबों के वारे न्यारे करते हैं, सवाल यह है कि
इन बहरूपियों के चंगुल से राष्ट्र को कैसे बचाया जाय ?
                                                  - डॉ. सुधाकर आशावादी 

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