देश का सियासी वातावरण जैसे राजनैतिक शुचिता से नितांत विलग नज़र आता है। जन मानस के लिए यह समझना कठिन है कि किस पर विश्वास करे , क्योंकि अब तक जिन जिन पर आम आदमी ने विश्वास किया है उसे बदले में विश्वासघात ही सहना पड़ा है।
- सुधाकर आशावादी
- सुधाकर आशावादी
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