साहित्य के अलंबरदारों ने साहित्य को भी बंधक बनाने का दिवास्वप्न देखा है . खेमेबंदी ने साहित्य की दिशा और दशा को खास दड़बों तक सीमित कर दिया है . चाहे साहित्य की कोई भी विधा हो, मगर अलम्बरदार हैं कि अपना एकछत्र साम्राज्य स्थापित करने की जुगत में जुटे रहते हैं .
@ सुधाकर आशावादी
@ सुधाकर आशावादी
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