अस्तित्व की खातिर :
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जंगल राज में हर कोई जुटा है
अपने अस्तित्व की रक्षा में ।
क्योंकि सबल नौंच खाने को
आतुर है हर निर्बल को
और निर्बल भयातुर है
अपनी प्राण रक्षा के लिए ।
सृष्टि का अस्तित्ववादी सिद्धांत
हर ओर अपना असर दिखा रहा है
समाज में पग-पग पर आदमी को
उसका अस्तित्व बता रहा है ।।
- डॉ.सुधाकर आशावादी
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