Tuesday, 6 February 2018

जिन पर शिक्षा सुधार का दायित्व है , वही शिक्षा का बंटाधार कर रहे हैं . शिक्षक शिक्षा पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता के लिए जिस राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद का गठन किया गया , वह भी धन की बंदरबांट तक सिमट कर रह गई . यकीन न आये तो इसके द्वारा शिक्षक शिक्षा पाठ्यक्रमों की मान्यता की सभी पत्रावलियों की किसी गोपनीय एजेंसी से जांच करा कर देख लें . दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा .
@ सुधाकर आशावादी

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