विकल्पहीन सियासत लोकतंत्र को कहाँ ले जाएगी , कोई नहीं जानता . देश का दुर्भाग्य यही है कि सियासत केवल गड़े मुर्दे उखाड़ने में जुटी रहती है . तथाकथित विपक्ष अपनी कमजोरी जानते हुए भी सकारात्मक बातें करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता . सीना तानकर कुछ नहीं बोल सकता , पग पग पर उसका चोर मन उसे नजरें झुकाने को विवश करता है , वह चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता सिवाय बेशर्मी दिखाने के .
@ सुधाकर आशावादी
@ सुधाकर आशावादी
No comments:
Post a Comment