Sunday, 2 June 2013

समाज किधर जा रहा है, रिश्तों की परिभाषाएं कैसे बदलती जा रही हैं, पुरातन नैतिकता के मूल्य किस प्रकार अपने अर्थ खोते जा रहे हैं ? यह चिंतनीय एवं विचारणीय बिंदु है । भौतिक जगत में देह एवं देह-जनित सम्बन्ध सर्वोपरि होते जा रहे हैं, मर्यादाएं अपनी ही सीमाओं में सिमटकर संकुचित होती जा रही हैं । ऐसे में प्रश्न यही उत्पन्न होता है - भारत भूमि आखिर क्यों अपनेपन से बंजर होती जा रही है ?
- सुधाकर आशावादी 

Thursday, 23 May 2013

सुप्रभात:
मैं नहीं कहता किसी से डर 
यदि डरना है तो अपने आप से डर । 
ज़वाबदेही है नहीं तेरी और किसी के लिए 
ज़वाब देना है हर पल तुझे अपने आप को ॥ 
- सुधाकर आशावादी 

Sunday, 12 May 2013

कभी फेसबुक कभी भेषबुक
तन्हाई है ...कहाँ जाऊं ? 
छुट्टी है कि कटने का नाम नहीं ले रही । 
लोग परेशान हैं कि उनके पास समय नहीं 
मैं परेशान हूँ कि समय का सदुपयोग कैसे करूँ ?
सुबह से कागज काले कर रहा हूँ ......और क्या करूँ ?
- सुधाकर आशावादी 

Tuesday, 7 May 2013

एक विचार :
कभी कभी कुछ नया करने के लिए मन करता है,मगर विचारणीय है कि संसार में नया क्या है, जो भी है,वह विद्यमान है, लगभग सौ बरस पहले जो कहानियां कालकूट ने लिखी वे आज भी प्रासंगिक हैं । किसी ने सच ही कहा है कि कथानक वही रहते हैं,मगर पात्र बदलते रहते हैं । जो विद्यमान है वही तो हम प्राप्त कर रहे हैं । ज्ञान के सागर में गोते लगाने का जो आनंद है,सम्भवत: वह आनंद भौतिक सुखों में भी नहीं है,क्योंकि ज्ञान के सागर में स्नान करके मानसिक द्वार संकीर्णता में सिमटकर नहीं रह सकते । ऐसा मेरा मत है । संकीर्णताएं वहीँ प्रवेश कर सकती हैं , जहाँ व्यक्ति अपनी समझ के द्वार बंद करके पूर्वाग्रह के द्वार खोल कर रखता है ।
- सुधाकर आशावादी 

Sunday, 3 March 2013

भाजपा मोदी के कद के सम्मुख बौनी हो चुकी है, सिर्फ भाजपा ही नहीं कॉन्ग्रेस भी परेशान है , उसे अपने दिग्गजों की टीम में कोई भी मोदी के मुकाबले हेतु नहीं मिल रहा है । महँगाई और घोटालों की पर्याय बनी कॉन्ग्रेस की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है, सो वह अब देश के आम आदमी की चिन्ता छोड़ कर अपने स्वार्थ सिद्ध करने में जुट गयी है ।
-सुधाकर आशावादी 

Monday, 4 February 2013

बज़ट का नाम लेकर हमको डराते क्यों हो 
जब बिना बज़ट के ही हमको लूट लेते हो ।
देश में अब किसको रहनुमा कहे अपना 
जिसे रहनुमा समझा वही रहजन निकला ।
- आशावादी 
किसी को अपना बना लो
या किसी के हो जाओ
जिंदगी के हसीन लम्हे
व्यर्थ न गंवाओं ।
- आशावादी